रेलवे के नुकसान को कम करने में लगी हैं मालगाड़ी।
भारतीय रेल में 70 और 30 का आंकड़ा काफी पहले से आपस में जुड़ा हुआ है। जैसे कि रेलवे की आमदनी 70% मालगाड़ी से होती है जबकि 30% यात्री गाड़ी से होती हैं। जबकि गाड़ियों की कुल संख्या में 30% मालगाड़ी चलती हैं और 70% यात्री गाड़ी चलती हैं। और तो और इनके मरम्मत या अनुरक्षण का खर्च भी लगभग यही अनुपात होता है। मतलब अनुरक्षण में जो खर्च होता है उसमें 30% मालगाड़ी पर और 70% यात्री गाड़ी पर होता है। जहाँ तक किराया में छूट की बात है। रेलवे में दोनों प्रकार की गाड़ियों के किराया में कई प्रकार की छूट है। कुल छूट में यात्री गाड़ी में लगभग 70% छूट है जबकि मालगाड़ी में लगभग 30% छूट है। अब आते हैं नुकसान की भरपाई के बारे में। एक दिन में रेलवे को लगभग 160 करोड़ रूपये का फायदा होता है। यात्री गाड़ी नहीं चल रही हैं। तो स्वभाविक रूप से प्रतिदिन इतना नुकसान हो रहा है। यह नुकसान रेलवे के विकास और प्रगति में काफी अवरोध उत्पन्न करेगा। फिर भी देश और देश की जनता के हित के लिए रेलवे अपना यह नुकसान सह रही है। इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है? संतोष इतना है कि मालगाड़ियां चल रही हैं और दनादन चल रही हैं। जो रेलवे को नुकसान के कम करने की कोशिश कर रही हैं। इस अवधि में सभी लोग पुलिस, डॉक्टर, नर्स और सफाई कर्मी को आभार व्यक्त कर रहे हैं, करना भी चाहिए। लेकिन रेलवे को संचालित करने वाले ओपन लाईन का पांचों विभाग स्टाफ पर्दे के पीछे से अपना काम तो कर ही रहा है। साथ ही साथ समय निकाल कर अपने पैसे या चंदे से लोगों को भोजन, मास्क और सेनेटराईज भी बाँट रहा है। पर्व में छुट्टी न मिलना तो समझने वाली बात है। लेकिन इस कठिन घड़ी में भी रेलवे स्टाफ बिना किसी बहाना के अपने कर्तव्य पर लगा है। यह एक बड़ाई और समर्पण वाला कार्य है। अभी जो अधिकतर मालगाड़ी चल रही हैं। उनमें अधिकतर अनाज ढ़ोने वाली, थर्मल पॉवर स्टेशन के लिए कोयला ढ़ोने वाली, दूध और दूध से बने प्रोडक्ट ढ़ोने वाली, पार्सल ट्रेन और कंटेनर ढ़ोने वाली मालगाड़ियाँ शामिल हैं। और अंत में सबसे इंट्रेस्टिंग बात यह कि जो मालगाड़ी अपनी यात्रा 3-4 दिन में पूरी करती थी। वह अब एक दिन में पूरी कर लेती है। पार्सल एक्सप्रेस के लिए तो टाईम टेबल बना दिया गया है। एक दम फिक्स और तेज गति से चल रही हैं। देश में BSNL की तरह रेलवे का अपना खुद का सबसे बड़ा टेलीफोन और इंटरनेट का नेटवर्क है। यात्रीगाड़ी, मालगाड़ी, रेलवे आरक्षण काउंटर, लैंड लाईन, कंट्रोल ऑफिस इत्यादि इसी से जुड़े रहते हैं। इसी में से मालगाड़ियों के लिए रेलवे के अपने नेटवर्क के FOIS सिस्टम का उपयोग किया जाता है। जिसमें मालगाड़ी के बारे में सभी जानकारी अपडेट होती रहती है।
प्रस्तुति और फोटो-विमलेश चन्द्र/11-04-2020 को पालनपुर में गाड़ी का अनुरक्षण करता हुआ स्टाफ. अहमदाबाद और वडोदरा मंडल से देश के सभी भागों में दूध भेजने के लिए दूध से भरी हुई मालगाड़ी रेगुलर चलती है।